सरयू के खड़े किनारे भगवान मांग रहे नैया
तुम कौन देश से आये और कौन देश को जाना तुम किसके राज दुलारे भगवान मांग रहे नैया
हम अवधपुरी से आये और चित्रकूट को जाना हम दशरथ राज दुलारे भगवान मांग रहे नैया
नाही उतारूं गंगा पार हो बिन धोये चरणवां
तोहरे चरणवां में जादू बड़ा भारी छूते ही कर दी थी पत्थर से नारी डर लागे मोहे सरकार हो बिन धोये चरणवां
तोहरे चरणवां की धूल लग जाई लकड़ी की नैया हमरी बन जाये नारी होय जैइयें दो दो नारी हो बिन धोये चरणवां
घर में कलह होई सौतन के काजे तुमको श्राप लागी हमरे घर की आके रघुकुल नही सरकार हो बिन धोये चरणवां
Nice
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